काठमांडू/गोरखा, 12 अक्टूबर 2026: नेपाल में एक बार फिर प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। मध्य नेपाल के गोरखा जिले में भूस्खलन के बाद बुधी गंडकी नदी का प्रवाह बाधित हुआ और फिर अचानक आई बाढ़ ने नदी किनारे बसे इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। तेज बहाव में मकान, झूला पुल, सड़क पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। शुरुआती आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, पांच लोग लापता हैं, जबकि प्रभावित इलाकों में तलाश, बचाव और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान जारी है।
अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय विकास केंद्र (ICIMOD) के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, गोरखा जिले में भूस्खलन से बनी अस्थायी रुकावट टूटने के कारण नदी में अचानक पानी बढ़ने की आशंका है। हालांकि, घटना के कारणों और नुकसान का अंतिम आकलन अभी बाकी है।
नेपाल के गोरखा जिले में भूस्खलन से कैसे आई अचानक बाढ़?
प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, गोरखा जिले के चुमनुब्री क्षेत्र के पास भूस्खलन के कारण नदी या उसकी सहायक जलधारा का प्रवाह अस्थायी रूप से रुक गया था। इसके चलते पानी जमा हुआ और अवरोध टूटने के बाद बड़ी मात्रा में पानी, गाद और मलबा नीचे की ओर बह निकला।
ICIMOD के अनुसार, 11 अक्टूबर की सुबह करीब 4 बजे नेपाल के बुधी गंडकी नदी तंत्र में अचानक बाढ़ आने का अनुमान है। इस घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदी के प्रवाह में अचानक बदलाव से पैदा होने वाले खतरों को उजागर किया है।
बाढ़ में मकान और पुल बहे, जलविद्युत परियोजना को भी नुकसान
बाढ़ के तेज बहाव ने गोरखा जिले के कई इलाकों में मकानों और संपर्क मार्गों को प्रभावित किया। शुरुआती रिपोर्टों में करीब एक दर्जन मकानों और दो झूला पुलों के बहने की जानकारी सामने आई। गोरखा और धादिंग जिले को जोड़ने वाले सड़क पुल को भी नुकसान पहुंचा है।
इसके अलावा, बुधी गंडकी जलविद्युत परियोजना के निर्माण स्थल पर भी क्षति की सूचना है। ICIMOD ने परियोजना के 341 मेगावाट क्षमता वाले स्थल पर नुकसान की पुष्टि करते हुए कहा कि कुल क्षति का आकलन अभी जारी है।
पांच लोग लापता, सेना और पुलिस का बचाव अभियान जारी
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसियों के अनुसार, बाढ़ के बाद पांच लोग लापता बताए गए हैं। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। शुरुआती रिपोर्टों में कम से कम 49 लोगों को बचाए जाने की जानकारी दी गई थी। राहत एवं बचाव अभियान जारी रहने के कारण ये आंकड़े आगे बदल सकते हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में नेपाल की सेना, पुलिस और अन्य बचाव दलों को तैनात किया गया है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने, लापता लोगों की तलाश करने और जोखिम वाले स्थानों से लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कई जिलों में बाढ़ का अलर्ट, नदी किनारे रहने वालों को चेतावनी
बुधी गंडकी नदी में पानी के स्तर में बदलाव को देखते हुए प्रशासन ने नदी के निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ाई है। गोरखा के अलावा तनहुँ, चितवन तथा पूर्वी और पश्चिमी नवलपरासी के नदी किनारे बसे क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
ICIMOD के मुताबिक, बुधी गंडकी के साथ-साथ त्रिशूली और नारायणी नदी तंत्र के आसपास के समुदायों के लिए भी चेतावनी जारी की गई थी। पहाड़ी नदियों में पानी का स्तर तेजी से बदल सकता है, इसलिए प्रशासन की सलाह का पालन करना और नदी के किनारों से दूर रहना महत्वपूर्ण है।
हिमालयी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, नदी के रास्ते में अस्थायी अवरोध और उसके अचानक टूटने जैसी घटनाएं कुछ ही समय में गंभीर बाढ़ का रूप ले सकती हैं। ऐसी स्थिति में पानी के साथ मिट्टी, पत्थर और मलबा भी तेजी से नीचे की ओर आता है, जिससे मकानों, पुलों, सड़कों और बिजली जैसी जरूरी सेवाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
ICIMOD ने इस घटना को कई प्राकृतिक खतरों के एक-दूसरे से जुड़ने का उदाहरण बताया है। संस्था के अनुसार, भविष्य में नुकसान कम करने के लिए अस्थिर पहाड़ी ढलानों और नदी प्रणालियों की संयुक्त निगरानी, बेहतर पूर्व चेतावनी व्यवस्था और जोखिम वाले क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण जरूरी हैं।
अगस्त की बाढ़ के बाद नेपाल के सामने फिर बड़ी चुनौती
नेपाल अभी अगस्त 2026 में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित समुदायों की सहायता और पुनर्वास की चुनौतियों से जूझ रहा है। संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगियों ने 4 सितंबर को प्रभावित लोगों की मदद के लिए 49.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आपात अपील जारी की थी। इस योजना का लक्ष्य 84,000 से अधिक लोगों तक सहायता पहुंचाना था।
ऐसे में बुधी गंडकी नदी में आई ताजा बाढ़ ने राहत और पुनर्वास के प्रयासों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों को सहायता और नदी किनारे बसे समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नुकसान का अंतिम आकलन और घटना के कारणों की विस्तृत पुष्टि होने के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
