नगर निगम श्रीनगर की सक्रिय भागीदारी से साकार हुआ ‘रजत जयंती पार्क’
जहां पहले जाने से कतराते थे लोग, अब वहीं उमड़ रही भीड़

संपादक: विजय पंवार
पौड़ी। नर्सरी रोड स्थित पुराने रैन बसेरे के पास, जहां पहले बड़ी मात्रा में कूड़ा फैला रहता था, अब उसी स्थान पर एक सुंदर ‘रजत जयंती पार्क’ विकसित किया गया है। यह पहल जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया और नगर निगम श्रीनगर के ठोस प्रयासों का परिणाम है। इससे न केवल क्षेत्र की सूरत निखरी है, बल्कि आसपास के लोगों को लंबे समय से चली आ रही गंदगी और बदबू की समस्या से भी राहत मिली है।
इस कार्य की शुरुआत जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद हुई। क्षेत्र में फैली गंदगी को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने नगर निगम को तत्काल प्रभाव से कूड़ा हटाने और ‘वेस्ट टू वंडर’ की थीम पर स्थल के पुनर्विकास के निर्देश दिए। नगर निगम ने तत्परता दिखाते हुए विशेष अभियान चलाया और वर्षों से जमा कूड़े को हटाकर उसे गिरीगांव स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में शिफ्ट किया।
इस मुहिम के तहत लगभग 18 हजार टन कूड़ा हटाया गया, जिसके बाद खाली हुई भूमि को समतल कर उसके सुनियोजित विकास की प्रक्रिया प्रारंभ की गयी। ‘वेस्ट टू वंडर’ थीम पर आधारित इस पार्क को ‘रजत जयंती पार्क’ के रूप में विकसित किया गया है, जो आज शहरवासियों के लिए एक आकर्षक और उपयोगी स्थल बन चुका है।
पार्क के विकास के दौरान यहां बच्चों के लिए झूले और अन्य खेल सामग्री स्थापित की गयी हैं, टहलने के लिए सुव्यवस्थित पाथवे बनाए गए हैं, बैठने के लिए बेंच, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट तथा लगभग 50–60 वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गयी है। हरियाली और स्वच्छ वातावरण इस पार्क को और भी खास बनाते हैं। जहां पहले लोग इस स्थान से गुजरने में भी असहज महसूस करते थे, वहीं अब सुबह और शाम यहां लोगों की अच्छी-खासी आवाजाही देखने को मिल रही है। स्थानीय निवासी यहां टहलते हैं, बच्चे खेलते हैं और परिवार के लोग सुकून के पल बिताते नजर आते हैं।
महापौर आरती भंडारी ने कहा कि यह स्थान पहले कूड़ा निस्तारण की बड़ी समस्या बना हुआ था, जिससे स्थानीय लोगों को लगातार असुविधा हो रही थी। नगर निगम ने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए वर्षों से जमा कूड़े को हटाकर उसे गिरीगांव स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में शिफ्ट किया। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से इस स्थल को एक सुव्यवस्थित और आकर्षक पार्क के रूप में तैयार किया गया। हमारा प्रयास रहा है कि शहर के ऐसे उपेक्षित स्थानों को उपयोगी सार्वजनिक स्थलों में विकसित किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि यह पहल केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि जनजीवन में सकारात्मक प्रभाव का उदाहरण भी है। इस पार्क के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि पुरानी और अनुपयोगी वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग कर उन्हें नई उपयोगिता प्रदान की जा सकती है। ‘वेस्ट टू वंडर’ की अवधारणा इसी सोच को दर्शाती है, जिसमें बेकार वस्तुओं को उपयोग में लाकर एक आकर्षक और जनोपयोगी स्थल विकसित किया गया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि इस प्रकार के प्रयास न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि संसाधनों के पुनः उपयोग की दिशा में भी लोगों को प्रेरित करते हैं। उन्होंने उपजिलाधिकारी श्रीनगर के सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कार्य में उनका समन्वय और निगरानी भी महत्वपूर्ण रही, जिससे योजना को व्यवस्थित ढंग से क्रियान्वित किया जा सका।
