
स्थानीय लोगों ने सरकार और पुलिस प्रशासन से किरायेदार सत्यापन, पहचान जांच और अवैध गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की
देहरादून/उत्तराखंड:
उत्तराखंड में लगातार बढ़ते बाहरी लोगों के आगमन और बसावट को लेकर अब प्रदेश के कई क्षेत्रों में चिंता बढ़ने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना उचित सत्यापन और निगरानी के हो रहे पलायन के कारण कई जगहों पर चोरी, मारपीट, नशे का कारोबार और अन्य आपराधिक घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। लोगों ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से इस विषय पर सख्त नियम लागू करने की मांग की है।
प्रदेश के कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में बाहरी लोग किराये पर रह रहे हैं या अस्थायी रूप से काम कर रहे हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन द्वारा समय-समय पर सत्यापन अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों का मानना है कि इन अभियानों में और अधिक तेजी तथा सख्ती लाने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि कई लोग बिना किसी वैध दस्तावेज और पहचान जांच के रह रहे हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि किरायेदारों, मजदूरों और अस्थायी रूप से रहने वाले व्यक्तियों का अनिवार्य सत्यापन होना चाहिए। साथ ही मकान मालिकों को भी बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किसी को कमरा या मकान देने पर जवाबदेह बनाया जाए। लोगों ने सुझाव दिया कि हर वार्ड और ग्राम स्तर पर सत्यापन अभियान नियमित रूप से चलाया जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई हो।
स्थानीय नागरिकों द्वारा दिए गए प्रमुख सुझाव इस प्रकार हैं:
- सभी किरायेदारों और बाहरी मजदूरों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन हो
- बिना पहचान पत्र के रहने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए
- मकान मालिकों की जिम्मेदारी तय की जाए
- बाजारों, कॉलोनियों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए
- ग्राम सभाओं और स्थानीय समितियों को भी निगरानी में शामिल किया जाए
- संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन और त्वरित कार्रवाई व्यवस्था मजबूत की जाए
लोगों का कहना है कि यह मुद्दा किसी क्षेत्र, जाति या समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि प्रदेश की सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ा विषय है। उनका मानना है कि समय रहते ठोस कदम उठाए गए तो भविष्य में संभावित अपराधों और अव्यवस्था को रोका जा सकता है।
वहीं सामाजिक संगठनों और कई स्थानीय नागरिकों ने सरकार से मांग की है कि उत्तराखंड की सुरक्षा, संस्कृति और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रभावी नीति बनाई जाए, ताकि प्रदेश में शांति और सुरक्षित वातावरण कायम रह सके।
